श्री रामेश्वर गहिरा गुरू संस्कृत महाविद्यालय कैलाशनाथ गुफा-सामरबार (जशपुर) छ.ग..

संस्कृत महाविद्यालयस्य परिचयः

अस्य श्री रामेश्वर गहिरा गुरू संस्कृत महाविद्यालय कैलाशनाथ गुफा-सामरबारस्य संक्षिप्त एैतिहासिक परिचयात्मकं आत्मनोमोक्षार्थ जगद्धिताय च विवरणम्। सोपानभूतम् मोक्षस्यमानवप्राण दुर्लभं वेतदान्तस्य सर्वोत्कृृष्ट मानवधर्म प्रेरणात्मक उक्त पंक्तेः सामारं कृतवंतः संस्था “सनातन संत समाज गहिरा“मुख्यालय- सामरबार द्वारा संचालित श्री रामेश्वर गहिरा गुरू संस्कृत महाविद्यालय कैलाशनाथ गुफा-सामरबारस्थ संस्थापना एैतिहासिक दृष्टया महाभारतकालीन अर्जुनवाणैः इख्वैः दग्ध खाण्डव वनप्रान्त (खुडि़या) क्षेत्रे तपोमूर्ति ब्रह्मलीन संत श्री गहिरा गुरूदेव स्वामी चरणैः सर्वजन हिताय आदिवासी वनवासी पहाड़ी कोरवा विशेष पिछड़ी जनजातीय निर्धन जनानां अमानवीय जीवने आमूलचूल परिवर्तनार्थम् मानवतावादिदृष्टि पथ मनुसृत्य लोकोक्तर कामनया प्रथम जुलाई खृश्टाब्द 1965 एकोनविंशति शतोत्तर पंचषष्ठी वर्षे अस्य महाविद्यालयस्य शुभारंभः अद्योलिखित समुद्देश्य पूतर्यै कृतवन्तः।

1. भारतीय संस्कृतेः अनुप्राणित बनवासी बालक बालिकानां सर्वांगिण विकासाय शैक्षणिक सांस्कृतिक अथ च सामाजिक समुन्नत्यै संस्थानानां निर्माणं संचालनं ब्यापक राष्ट्रीय उद्देश्याणां लक्ष्य प्राप्त्ये सुयोग्य प्रबुद्ध नागरिकाणां निर्माणं।
2. बनवासी परिक्षेत्रानुकूल आर्थिक कृशि औद्योगिक विकासस्य संभावनायाः शैक्षणिक कार्यक्रमाः।
3. अमरवाणी संस्कृत भाषायाः प्रचार प्रसारार्थं संस्कृत विद्यालय महाविद्यालयानां शुभारंभः विश्वकल्याणार्थं पर्यावरण वायुमण्डल संशुद्धये वनसंरक्षणम् सहस्त्राधिक बैदिक यज्ञानां आयोजनम्।
4. अविभाजित मध्यप्रदेशस्य बीहड़ बनांचल पूर्वोत्तर क्षेत्रे परम् पूज्य श्री गहिरा गुरूजी स्वामी चरणैः अमानवीय जीवन जीवैतारः यथा प्शुनांवृत्य मांस मदिरा खान-पान सैचादि क्रिया निवृŸये बिना जल स्पर्श पवित्रं अपवित्र विचारैः अनभिज्ञता (जादू- टोना) इत्यादि कुरीतिमनुसृत्य संदेहास्पद अवस्थायां हत्याकरणं बाल विवाह शिक्षाया अनभिज्ञता आजीविकाया सघन शासकीय स्तरेण उपलभ्यमान सौविध्यात् पलायनं जनसामान्यैः भयभीतं भूत्वा पलायनं जनविहीन स्थले निवास निर्माणं एता दृशाः लक्ष्यधिक बनवासीनां व्यक्तिनिर्माणस्य अनुठा दृश्य परम् पूज्य गहिरा गुरू स्वामी चरणैः सम्प्रेरितः रामचरितमानस पाठ माध्यमेन उड़ीसा अविभाजित बिहार प्रांत उरप्रदेश अथ च छत्तीसगढस्थ क्षेत्रे: समादृतं । मध्यवर्ती क्षेत्रं यावत् जनै जनै गृहे गृहे जागरणाय बारं बारं गत्वा तां जनां जागृतं कृत्वा स्वकीय प्रेम स्नेह तेषां कुरीति युतानां जनानां कुरीतिगत् आचरणे गत्वा अनुभूत विषयात्मकं अभिलक्ष्य महापुरूशत्व संस्पर्सेण अमानवीय जीवन जीवैतारः जनानां सुसंस्कारितं कृत्वा एक सभ्य मानव निर्माणस्य अभूतपूर्व कार्य कृतः।
चत्वारिंशत् वर्ष प्रवृ अस्य संस्कृत महाविद्यालयस्य संस्थपना गहिरा गुरूदेव महापुरूशेण कृतः अतिशयोक्तिर्नास्ति। यत तक्श्यशिला नालंदा विश्वविद्यालयस्य शैक्षणिक पृश्ठीमि मनुसृत्य अश्मिन महाविद्यालये 90 प्रतिशत् यावत् आदिवासी छात्राः छात्राश्च अन्यदीय छात्राः वा भारतीय परंपरानुकूलेन धौतोरीय वस्त्राणी धारयन्ती अध्यापका आचार्याः प्राचार्याः भृत्याः सर्वेपि धौतोरीय वस्त्राणि अहर्निशं गृहणन्ति।
वस्तुतस्तु नैसर्गिकं खलविदं आवासीय संस्कृत महाविद्यालयः छीसगढ़ प्रान्तस्य प्राच्य संस्कृत संकाय एकाकिनः एव महाविद्यालयः गौरौवर्धनार्थं भविश्यत् कालं यावत् चकास्ते।
एशा महाविद्यालयः यः सनातन संत समाज गहिरा संस्थानस्य लक्शाधिक सदस्याणां मुश्ठिकं यावत् अन्नदान सहयोगेन छात्र छात्रान निःशुल्क भोजन आवासन् प्रदियते अध्यापनं प्रचलति।
प्राच्य संस्कृत संकायस्य अध्ययन अध्यापनेन साकं कम्प्यूटर टंकण प्रिंटिंग पेंटिंग चित्रकला अथ च कन्याभ्यः कढ़ाई सिलाई सहैव सांस्कृतिक गतिविधिनां संचालनं संस्कृत संगोश्ठी आधुनिक ज्ञान विज्ञान संगोश्ठी संस्कृत प्रशिक्षकस्य विशेश व्यवस्था वर्तते। उल्लेखनीयं इदं अस्ति यत् नैतिकतायाः सुदृढ़ पृश्ठीभूमौ आदिवासी छात्र छात्राः व्याप्त कुरीतीनां परिमार्जनाय संस्थायाः उद्देश्ये दृढ़तया सहभागी सिद्धाः भवन्ति संस्था उक्त आदर्शेंण अभिप्रेरितः ।
संत गहिरा गुरू देवानां आदर्श मार्गदर्शनमिदं वर्तते । चोरी दारी हत्या मिथ्ययाः त्यागं कुर्वन्तु । सत्य शांति दया क्शमा धारणं कुर्वन्तु ।
               महाविद्यालय का संक्शिप्त परिचय एवं भौगोलिक स्थिति दिनांक- वनवासिायों द्वारा संचालित संस्था “सनातन संत समाज गहिरा“ मुख्यालय-सामरबार जिला जशपुरद्वारा संचालित श्री रामेश्वर गहिरा गुरू संस्कृत महाविद्यालय कैलाश नाथ गुफा सामरबार की स्थापना तपोमूर्ति ब्रह्मलीन संत परम पूज्य श्री रामेश्वर गहिरा गुरूजी महाराज के द्वारा सर्वजन हिताय आदिवासी वनवासी पहाड़ी कोरवाओं एवं निर्धन छात्रों के अमानवीय जीवन को सुधारने हेतु एवं उच्च शिक्शा में गुणवा प्रदान करने के लिए 1 जुलाई सन् 1965 में किया गया। यह महाविद्यालय बगीचा तहसील अन्तर्गत बगीचा से बतौली अम्बि कापुर मार्ग पर बिमड़ा से 4 कि.मी. उार में 23 अंश उारी अक्शांश तथा 23 अंश 37 मि. पूर्वी देशान्तर पर ग्राम सामरबार में स्थित है। यह महाविद्यालय अग्रणी महाविद्यालय शासकीय रामभजन राय एन.ई.एस. स्नातकार महाविद्यालय जशपुर के निर्देशों के अनुपालन सहित पं0 रविशंकर शुक्ल विश्व विद्यालय रायपुर एवं उच्च शिक्शा विभाग छासगढ़ शासन के निर्देशों का पालन करता है। यह महाविद्यालय प्रारंभ में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से 1985 तक सम्बद्ध रहा इसके पश्चात् सन् 1985 से 2000 तक अविभाजित मध्यप्रदेश के अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा से सम्बद्ध रहा। वर्तमान में महाविद्यालय को पं0 रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से स्थाई सम्बद्धता/ मान्यता प्राप्त है। महाविद्यालय को 1998 से नियमित अनुदान प्राप्त हो रहा है। छसगढ़ का यह एक मात्र प्राच्य संस्व्कृत महाविद्यालय है जहागुरूकूल परम्परा के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत आदिवासी विशेश पिछड़ी जनजाति (पहाड़ी कोरवा) पिछड़े वर्ग के छात्र/छात्राएं निःशुल्क शिक्शा ग्रहण कर रहे हैं। जो कि प्रदेश ही नही अपितु राश्ट्र के लिए भी गौरव का विषय है। यह महाविद्यालय जहां एक ओर आदिवासी छात्र/छात्राओं में अमरवाणी संस्कृत के साथ साथ आदर्श नैतिक गुणों का विकास कर रहा है वहीं दूसरी ओर प्रदेश के शिक्शा विभाग में संस्कृत हेतु आरक्शित शिक्शक पदों को पूर्ण कर रहा है। यह उल्लेखनीय है कि नैतकता के ढांचे में ढले ये आदिवासी छात्र/छात्राएं अपने परिवारों में ब्याप्त मांस-मदिरा अन्धविश्वास एवं नक्सलवाद जैसी प्रमुख सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में दृढ़ता से सहभागी सिद्ध हो रहे हैं।